Skip to main content

What is Earthing (अर्थिंग क्या होती है)

 What is Earthing (अर्थिंग क्या होती है)

                                    C:\Users\Ravi\Downloads\download.jpg

Earthing के अंदर सबसे पहले हम जमीन के अंदर एक गहरे खड्ढे को करके वहाँ से एक वायर को निकाल लेते है। अब इस वायर को हम हमारे इलेक्ट्रिकल के उपकरण की बॉडी पर जोड़ देते है।

यह अर्थिंग वायर को उस उपकरण पर जोड़ा जाता है, जिसकी बॉडी मेटल की बनी होती है। क्योंकि मेटल से बनी बॉडी पर करंट आसानी से फ्लो हो जाता है।

अर्थिंग की जरूरत- अर्थिंग करने के बाद अगर कभी किसी कारण से सप्लाई वायर उपकरण की बॉडी के भीड़ जाता है। तो उस समय करंट हमारे अर्थ वायर की मदद से जमीन के अंदर जाने लग जाएगा। इस बीच अगर कोई उपकरण की बॉडी को आकर छूता भी है, तो उसको करंट नही लगता है।

सबसे पहले आपको यह याद रखना है की, अर्थिंग और ग्राउंडिंग दोनो ही एक तरह से ही की जाती है। मतलब दोनो के अंदर ही जमीन में गहरा खड्डा करके उसमे से एक वायर को निकाल लिया जाता है।

लेकिन अब हम जमीन से निकाले गए इस वायर को किस जगह पर जोड़ रहे है, उससे फर्क पड़ता है की वह earthing कहलाएगी या फिर Grounding.

 How Earthing works (अर्थिंग कैसे काम करती है

इसको हम काफी आसानी से समझ सकते है।

जैसे- कोई मोटर है, ओर उस मोटर को हमने अर्थिंग नही कर रखा है। अब अगर मोटर में कभी कोई इलेक्ट्रिकल फाल्ट होता है। जैसे मोटर की वाइंडिंग जल जाना या फिर हमारी सप्लाई केबल का कट कर मोटर की बॉडी पर लग जाना। इस समय अगर हमने मोटर की बॉडी को अर्थिंग नही कर रखा है, तो फाल्ट के समय करंट हमारी मोटर की बॉडी पर बहने लगेगा और अगर इसी समय किसी ने इस मोटर को गलती से छू लिया तो उसे काफी बड़ा इलेक्ट्रिकल शॉक लग सकता है।

पर अगर हमने मोटर को अर्थिंग कर रखी है तो मोटर की बॉडी का करंट हमारे अर्थ वायर से जमीन के अंदर चला जाएगा ओर हमको करंट नही लगेगा।

हमारी शरीर का रेसिस्टेंट 1000 ohm या उससे भी ज्यादा होता है, परन्तु हम जिस अर्थिंग को करते है उसका रेजिस्टेंस हम 1 ohm से 5 ohm के बीच रखते है।

How do earthing (अर्थिंग कैसे करते है

अर्थिंग करना काफी आसान है। अर्थिंग का मतलब हमको उस उपकरण की मेटल से बनी बॉडी को जमीन से जोड़ना है। 

अर्थिंग जाँच कैसे करते है


                                            C:\Users\Ravi\Downloads\images.jpg



 Earthing resistance कितना होना चाहिए 

अर्थिंग को हमारी ओर उपकरण की सेफ्टी के लिए उपयोग करते है, अर्थिंग का रेजिस्टेंस जितना कम होगा वह अर्थिंग उतनी अच्छी कहलाएगी। सबसे अच्छी अर्थिंग 0 ओम की होगी पर 0 ओम रखना पॉसिबल नही है।

  • पावर प्लांट की अर्थिंग का रेजिस्टेंस 0.5 ohm या इससे कम रखा जाता है।
  • सबस्टेशन में अर्थिंग के रेजिस्टेंस को 2 ohm से कम रखा जाता है।
  • घर के अर्थिंग का रेजिस्टेंस 8 ohm से कम अच्छा माना जाता है।

 How reduce Earthing resistance  (हम अर्थिंग के रेजिस्टेंस को कम करने के लिए कुछ तरीके अपनाते है।)

 Maintain Moisture of earth- अर्थ के रेजिस्टेंस को बराबर रखने के लिए हम पानी का उपयोग करते है ओर समय समय पर अर्थिंग पॉइंट में पानी भी डालते है। 

Use of Salt and Coal in Earthing- जिस जगह हमने अर्थिंग के लिए इलेक्ट्रोड को जमीन में डाल रखा है, वहाँ पर नमक और कोयला को डालने से भी जमीन का रेजिस्टेंस काफी समय तक मेन्टेन रहता है।

What is Grounding (ग्राउंडिंग क्या होती है)  

 C:\Users\Ravi\Downloads\lrg-893-grounding-rod__1_.jpg


Grounding के अंदर भी अर्थिंग की तरह सबसे पहले जमीन में खड्डा करके एक वायर को बाहर निकाल लिया जाता है। पर ग्राउंडिंग के समय हम इस वायर को उपकरण की बॉडी से नही जोड़ते है।

Grounding के समय हम अर्थ के वायर को लाइव सप्लाई के न्यूट्रल से जोड़ते है। ग्राउंडिंग का उपयोग बेहतर तरीके से करंट को जाने का रास्ता मिल जाए इसके लिए किया जाता है।

अर्थिंग और ग्राउंडिंग में अंतर

         C:\Users\Ravi\Downloads\Difference-Between-Earthing-and-Grounding--300x169.jpg


अर्थिंग में हम उपकरण की बॉडी और जमीन को आपस में जोड़ते है। लेकिन ग्राउंडिंग के समय हम इलेक्ट्रिकल सर्किट के न्यूट्रल को जमीन से जोड़ते है।

ग्राउंडिंग के लिए अधिकतर काले रंग के तार का उपयोग किया जाता है। और अर्थिंग के लिए हरे रंग के तार का उपयोग किया जाता है

Earthing का उपयोग इलेक्ट्रिकल शॉक से बचने के लिए किया जाता है। लेकिन ग्राउंडिंग का मुख्य उपयोग थ्री फेज इलेक्ट्रिकल सिस्टम को unbalance होने से बचाने के लिए किया जाता है।

Grounding के अंदर लाइव पार्ट जिसमे करंट बह रहा है उसको जमीन से जोड़ा जाता है। लेकिन Earthing के समय Dead part को जमीन से जोड़ा जाता है। मतलब उस पार्ट को, जो की नॉर्मल कंडीशन में करंट के सम्पर्क में नही होता है।


Comments

Popular posts from this blog

वायर जॉइंट के Different प्रकार

 Different Types of Wire Joint Requirement:- किसी भी तार में जॉइंट बनाने की जरुरत क्यों पड़ती है किसी भी वायर में जॉइंट बनाने की जरुरत इसलिए पड़ती है ताकि किसी भी चालक तार की लम्बाई बढ़ाई जा सके और किसी चालक लाइन में से किसी अन्य लाइन को जॉइंट बनाकर उसे स्थाई रूप से जोड़ा जा सके जॉइंट ऐसा होना चाहिए की वह लाइन को अच्छे कनेक्ट तथा लाइन को पर्याप्त सुद्रढ़ता भी प्रदान कर सके,,इन जोइन्टो को विभिन्न प्रकार से तैयार किया जाता है यह चालक तार की मोटाई,जोड़ की किस्म,जॉइंट किस लाइन में लगाना है इत्यादि पर निर्भर करती है  ।   Different Types of  Joints:-ओवर हेड लाइन्स तथा घरेलु वायरिंग में मुख्यतः निम्न जोड़ प्रचलित है  Twisted Joint(ऐंठा हुआ जोड़) :- इस प्रकार के जॉइंट में तारो अथवा केबल के चालक सिरों को आपस में ऐंठ कर उनके अंतिम समापन सिरों को जोड़ की और मोड़ देते है इस प्रकार का जॉइंट ओवर हेड लाइन में खम्बो के ऊपर लगे इंसुलेटर पर लगाया जाता है इसे किसी लाइन के मध्य में नहीं लगाया जाता है इसे Pig Tail अथवा Rat-Tail Joint जॉइंट भी कहते है।    Married Joint(मै...

Stabilizer in Hindi स्टेबलाइजर की पूरी जानकारी हिंदी में

स्टेबलाइजर क्या होता है घर के लिए सही वोल्टेज स्टेबलाइजर आपने वोल्टेज स्टेबलाइजर के बारे में जरूर सुना होगा और आपके घर में stabilizer जरूर होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्टेबलाइजर क्या होता है?(what is stabilizer ?) क्या आप जानते हैं कि स्टेबलाइजर का काम क्या है और स्टेबलाइजर कितने प्रकार के होता है? क्या आप जानते हैं कि स्टेबलाइजर कैसे काम करता है? यदि नहीं जानते हैं तो हमारा ये पोस्ट जरूर पढ़ें। इस पोस्ट में आज हम स्टेबलाइजर की पूरी जानकारी हिंदी(stabilizer in Hindi) में देने जा रहे हैं। स्टेबलाइजर एक ऐसी डिवाइस होती है जो कि Fix Value की वोल्टेज प्रदान करता है.हमारे घर में कुछ ऐसे उपकरण होते हैं जिन्हें कम से कम 240 V की सप्लाई की जरूरत होती है और कुछ कारणवश हमारे घर में अगर सप्लाई 240V से कम आती है तो वह उपकरण ठीक प्रकार से कार्य नहीं कर पाता इसीलिए उसके लिए स्टेबलाइजर की जरूरत पड़ती है. जो कि हमारे घर में आने वाली सप्लाई को 240V पर Fix कर के उपकरण को 240V की सप्लाई प्रदान करता है. स्टेबलाइजर का इस्तेमाल ज्यादातर रेफ्रिजरेटर  (फ्रिज) एयर कंडीशनर इत्यादि पर किया जाता ...

what is flip flop in hindi and type of flip flop

what is a flip flop (फ्लिप  फ्लॉप क्या है?) Flip flop यह एक प्रकार की सर्किट है, जसमे दो स्टेज (0 या 1) होता है. तथा इसका इस्तेमाल state information को स्टोर करने के लिए होता है।फिल्प-फ्लॉप एक sequential logic circuit है, जो एक Bit का data स्टोर करने के लिए सक्षम होता है। Flip flop का आउटपुट stable होता है।  और यह दो वैल्यू को ही carry करता है हाई वोल्टेज या लौ वोल्टेज जैसे की एक आउटपुट या तो 0 होगा या फिर 1 होगा। Flip flop यह बाइनरी स्टोरेज डिवाइस है जिसमे binary  bit 0 और 1 स्टोर क्र सकते है।  यह एक कंप्यूटर का सबसे छोटा स्टोरेज यूनिट होता है,यह एक  सिंगल bit का देता स्टोर करता है। एक्सटर्नल इनपुट की संख्या Flip flop के टाइप पर निर्भर  करती है। Flip flop को स्टेबल multi-vibrator  भी कहते है.इसको सबसे पहले जिसने बनया था उसका नाम william Eccels  और F.W.jordan  ने 1918 में विकसित किया था, Flip flop के दो आउटपुट होते है  Q  और  Q    जिसमे आउट एक दूसरे से विपरीत होते है जैसे की एक का ऑउटपु 0 तो दूसे का आउटपुट 1 होग...