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Showing posts from May, 2020

How to Select TTP223 Capacitive touch sensor (touch switch) Output Mode In Hindi

इस पोस्ट में आज TTP223 Touch Sensor के आउटपुट मोड के बारे में बताने वाला हु  की A और B में किसे सोल्डर करने पर क्या आउटपुट मिलता है और मोड सिलेक्शन किस तरह समझ सकते है और सेंसिटिविटी के बारे में बताने वाला हु . TTP223 Features Operating voltage 2.0V~5.5V Operating current @VDD=3V, no load At low power mode typical 1.5uA, maximum 3.0uA The response time max 220mS at low power mode @VDD=3V Sensitivity can adjust by the capacitance(0~50pF) outside Stable touching detection of the human body for replacing traditional direct switch key Provides Low Power mode Provides direct mode、toggle mode by pad option(TOG pin) Q pin is CMOS output All output modes can be selected active high or active low by pad option(AHLB pin) After power-on have about 0.5sec stable-time, during the time do not touch the keypad, And the function is disabled Auto calibration for life. At low power mode, the re-calibration period is about 4.0sec normally, When key detected touch and released touch, the auto re-calibrati

सिंगल फेज और थ्री फेज में क्या होता है|What is the single phase and three phase?

सिंगल फेज और 3 फेज की सप्लाई में काफी अंतर है. हमारे घरों में आने वाली सप्लाई सिंगल फेज की होती है क्योंकि हमारे घर में इतने बड़े उपकरण नहीं होते कि जिन्हें थ्री फेस की सप्लाई की जरूरत पड़े. थ्री फेज की सप्लाई की जरूरत बड़े बड़े उद्योगों में पढ़ती है जहां पर बड़ी-बड़ी मोटरें और ऐसे उपकरण चलाएं जाते हैं जिन्हें चलने के लिए बहुत ज्यादा पावर की जरूरत होती है . हमारे घर में सामान्य पानी के पंप में जो मोटर लगी होती है वह 0.5 Hp या 1 HP तक की होती है जो कि सिंगल फेज में आसानी से चल सकती है. लेकिन अगर हमें कहीं पर 5 HP की मोटर चलानी है तो इसके लिए हमें तीन फेज की सप्लाई की जरूरत पड़ेगी. क्योंकि हम सब जानते हैं मोटर जब स्टार्ट होती है तो उसे बहुत ज्यादा पावर की जरुरत होती है. इसीलिए ज्यादा बड़ी मोटर के लिए 3 फेज की सप्लाई की जरूरत पड़ती है  थ्री फेज की सप्लाई में तीन तारे होती है जिनमें सप्लाई भी अलग-अलग होती है. हम सिंगल फेस को सीधे थ्री फेज में नहीं बदल सकते. थ्री फेज की सप्लाई बनाने के लिए इलेक्ट्रिक जनरेटर में ही अलग Coil लगाई जाती है जिससे एक समय पर तीनों फेज बनाए जा सके.जैसा कि हम सब जान

Earthing क्या है|अर्थिंग क्यों आवश्यक है |अर्थिंग के प्रकार

आप ने अर्थिग के बारे में जरूर सुना होगा तो अगर आपको नहीं पता कि अर्थिंग क्या है ( What Is Earthing In Hindi) और यह हमारे लिए क्यों जरूरी है. और किस किस उपकरण पर अर्थिंग करना बहुत जरूरी होता है. और अर्थिंग और . यह सब जानकारी हम इस पोस्ट में आपको देने वाले हैं. घर की Wiring  करते समय आपको बहुत सी बातों का ध्यान रखना पड़ता है. स्विच बोर्ड में कनेक्शन करते समय आपको सभी तारों को ध्यान में रखना पड़ता है कि कौन सी तार में बिजली है और कौन सी वायर न्यूट्रल है या जिस में बिजली नहीं है. इस के अलावा हम एक और तार का भी कनेक्शन स्विच बोर्ड में करते हैं जिसे हम अर्थिंग या ग्राउंडिंग की तार कहते हैं. लेकिन यह हमारे लिए क्यों जरूरी है इसका पता सभी को नहीं होता. तो इसीलिए हम आपको Electrical Earthing In Hindi में बताने वाले हैं. Definition Of Earthing In Hindi किसी भी धातु वाली मशीन या उपकरण के धातु वाले हिस्से पर एक तार जोड़ कर उसे हम Earth Plate और Earth Electrode के साथ में जोड़ देते हैं इसे हम अर्थिंग या ग्राउंडिंग कहते हैं.पृथ्वी प्लेट या पृथ्वी इलेक्ट्रोड के लिए हम एक काफी मोटी तार का इस्तेमाल करते

Tinkercad Circuit Simulation Full Tutorials in Hindi

हैल्लो दोस्तों में आज इस पोस्ट में Tinkercad के सर्किट सिमुलेशन के टुटोरिअल सीरीज लाया हु जिसमे मेने इसे की तरह उपयोग करना है और सर्किट का simulation कर के बतया है  Tinkercad Circuit Simulation Tutorial Full information (Part-1) (Tools Overview) in Hindi इस वीडियो में मैंने टिंकरकाड वेबसइट के बारे में टुटोरिअल बनाया है जिसका  ये पहला वीडियो है जिसमे मेने टिंकरकाड में लॉगिंग कैसे करना है और सर्किट को बनाने में उपयोग होने वाले टूल्स को डिटेल में बताया  है की इन टूल्स का काम क्या है और इन कैसे उपयोग करना  है और आने वाले वीडियो टुटोरिअल  में इसके कम्पोनेंट और इससे सिमुलेशन कैसे करते है इसके बारे में बताने वाला हु Component List (Part-2) Tinkercad Circuit Simulation Tutorial Full information in Hindi इस video में मैंने Tinkercad के component और दूसरे simulation tool के बारे में बताया है और इसके  कुछ अच्छे फंक्शन के बारे में भी इसमें बताया है ये इस टुटोरिअल सीरीज का दूसरा वीडियो है इस वीडियो में मेने इसके tools को समझाया है की टूल्स का काम क्या है और ये किस तरह वर्क करता है और component कौन

Ultrasonic Sensor HC-SR04 and Arduino Tutorial in Hindi

इस Arduino ट्यूटोरियल में हम सीखेंगे कि HC-SR04 Ultrasonic Sensor  कैसे काम करता है और इसे Arduino Board के साथ कैसे उपयोग किया जाता है। इसके लिए आपको एक अल्ट्रासोनिक सेंसर,16x2 lcd ,Arduino की जरुरत पड़ेगी इसमें पहले हम सेंसर कैसे काम करता है ये जानेगे और फिर इसे कैसे उपयोग करना है यह जानेगे HC-SR04 Ultrasonic sensor with Arduino  Introduction To Ultrasonic Sensor  यह Ultrasonic Sensor Hc-sr04 एक बहुत ही usefull sensor है जिसका use बहुत से Project में किया जाता है जैसे यह Distance determine करने में  Radar,Sonar का काम करता है और यह ultrasonic waves पर काम करता है जैसे चमगादड़ देखने के लिए उपयोग करता है यह सामने रखे object को sens करता है इस लिए इसे Ultrasonic Sensor self Driving robot car में भी use कर सकते है security devices में भी use कियाजा  सकता है और यह Robot की आँखे  बन सकता है  इस hc-sr04 ultrasonic sensor का  Ultrasonic Sensor Hc-sr04  Hc-sr04 चार pins होती है Echo,Trigger,Gnd,Vcc जिन्हें Microcontroller  कंट्रोलर से आसानी से Connect किया जा सकता है Ultrasonic Sensor Hc-

Three Phase को 440v कहते हैं 660v क्योँ नहीँ, Three Phase is called 440Volt, WHY NOT CALLED IS 660 volt Hindi

जैसा कि आप लोग जानते हैं AC supply में करंट का frequency 50Hz होता है इसका मतलब यह हुआ कि यह करंट 1 सेकंड में 50 बार पॉजिटिव और नेगेटिव होती है इस करंट को हम देख नहीं सकते और इस की फ्रीक्वेंसी को मापने के लिए frequency मीटर की जरूरत पड़ती है जैसा कि आप देख पा रहे हैं स्क्रीन पर इस तरह से हमारी इलेक्ट्रिसिटी बहती है  जैसा कि आप देख पा रहे हैं  R PHASE 1 अपने जगह से बह रहा है एकदम सेंटर से इसके साथ जो दूसरा फेस B PHASE 2 है ऊपर से बह रहा है इन दोनों का जो PHASE डिफरेंस होगा वह 440 होगा जैसा कि आप देख पा रहे हैं 3 Phase Waveform अब तीसरा Y PHASE 3  नीचे से आ रहा है जो हमारे दो फेस हैं वह positive की तरफ है  3 Phase Waveform  में  1 phase हमेशा नीचे आएगा  R.Y.B  में से कोई भी 2 phase ऊपर होता है  50 Hz के अंतर्गत चेंज होती रहती है मतलब कि आपका दो फेज में ही आपका करंट होता है एक Phase हमेशा आपक| माइनस होता है मतलब कि कभी आपका रेड wire माइनस में हो जाएगा कभी ब्लू wire हो जाएगा मतलब कि 1 सेकेंड में 50 बार यह चेंज हो जाती है इसलिए हम इसे 50Hz कहते हैं 3 फेज में 440 इसलिए कहते हैं कि उसके हमेशा

पोटेंशियोमीटर (Potentiometer) क्या है इसके काम क्या ?

ऐसे रेसिस्टर्स जिनका मान सरलता से घटाया बढ़ाया जासके इस तरह के resistor को पोटेंशियोमीटर कहलाते है। रेडियो रिसीवर में वोल्यूम तथा टोन नियंत्रण के लिए प्रयोग किये जाने वाले रेसिस्टर पोटेंशियोमीटर कहलाते है,और  Lamp के  सीरीज में पोटेंशियोमीटर को connect  करके सरलता से  lamp के प्रकाश  को कम ज्यादा किया जा सकता है  इनसे एक व्रताकार पट्टी जो लगभग ¾ व्रत खण्ड आकार की होती है के ऊपर कार्बन फिल्म जमाई जाती है । एक धुरे से जुड़ा एक आर्म इस पत्ती पर इस प्रकार गति करता है कि आर्म तथा पत्ती के एक सिरे के बीच शून्य से अधिकतम के बीच कोई भी रेसिस्टेन्स मान प्राप्त किया जा सके।  पोटेंशियोमीटर अधिकतर कार्बन किस्म के बनाये जाते है परन्तु कुछ विशेष कार्यो (जैसे मल्टीमीटर में सैल के  E M F के संयोजन के लिए लगाया गया नियंत्रण ) के लिए निम्न मान (जैसे 1 से 100 ओम तक) के वायर वाउंड किस्म के पोटेंशियोमीटर भी बनाये जाते है कार्बन पोटेंशियोमीटर निम्न दो प्रकार के होते है। 1 – लीनियर पोटेंशियोमीटर (Linear Potentiometer) इसमे रेसिस्टेन्स मान में परिवर्तन उसके आर्म के घुमाव कोण के समानुपाती