Skip to main content

प्रतिरोध की गणना कैसे करें – How To Calculate Resistance Value in Hindi

कोई भी सर्किट बनाने से पहले उसका सर्किट डायग्राम बनाया जाता है और उस सर्किट डायग्राम में अलग-अलग कंपोनेंट लगाए जाते हैं और सभी कॉन्पोनेंट की कोई ना कोई निश्चित वैल्यू होती है और उसे निश्चित वैल्यू के आधार पर इस कंपोनेंट को लगाया जाता है. तो कुछ कंपोनेंट ऐसे होते हैं. जिन पर उनकी वैल्यू लिखी होती है जैसे की कैपेसिटर.

लेकिन कुछ कंपोनेंट ऐसे होते हैं जिन पर उनकी वैल्यू नहीं लिखी होती उन पर कुछ कोड लिखा होता है जिनसे हमें पता लगाना पड़ता है कि इस कॉम्पोनेन्ट की  वैल्यू कितनी है.

प्रतिरोध (Resistance) भी एक ऐसा ही कॉन्पोनेंट है जिस पर उसकी वैल्यू नहीं लिखी होती लेकिन रजिस्टेंस के ऊपर कुछ कलर कोड बनाए जाते हैं जिससे कि उसकी वैल्यू पता लगाई जा सकती है. इन कलर कोड को याद रखना भी बहुत ही आसान है बस आपको थोड़ा सा ध्यान देने की जरूरत है. इन कलर कोड को आपको बार-बार लिखकर देखने की जरूरत है.
 इस पोस्ट में आपको Resistance की value को जान सकते है Using Colour Code In Hindi में बताउगा .

प्रतिरोध की गणना Colour Code से कैसे करें

प्रतिरोध पर कलर कोड का मतलब होता है कि उस पर कुछ कलर की लाइनें बनाई जाती है अलग-अलग कलर के द्वारा जैसे कि लाल , नीला, काला इत्यादि. इन सभी कलर को एक खास पैटर्न में मिलाकर किसी भी प्रतिरोध की वैल्यू पता कर सकते हैं. सभी रजिस्टेंस पर 3 रंग  की लाइनें बनाई जाती है. लेकिन इसके अलावा भी उस पर एक और गोल्डन और सिल्वर रंग की लाइन लगाई जाती है जिसे टॉलरेंस रिंग कहते हैं.

टॉलरेंस रिंग में जो भी रंग दिखाया जाता है वह उस प्रतिरोध के प्रतिरोधकता क्षमता पर तापमान के कारण जो प्रभाव पड़ता है उस को दर्शाता है. अगर टॉलरेंस रिंग सुनहरी (Golden) हो तो प्रतिरोधकता तापमान के कारण 5% कम या ज्यादा हो सकती है. अगर टॉलरेंस रिंग सिल्वर रंग हो तो प्रतिरोधकता तापमान के कारण 10% कम या ज्यादा हो सकती है. अगर टॉलरेंस रिंग कोई रंग ना हो तो प्रतिरोधकता तापमान के कारण 20% कम या ज्यादा हो सकती है.
टॉलरेंस को हमें जान लिया अब हम रेसिस्टर के कलर बेंड के आदर पर उसके प्रकार है 
4 बेंड वाला रेसिस्टर 

5 बेंड वाला रेसिस्टर 

और,
 6 बेंड वाला रेसिस्टर 

अब रेसिस्टर कलर कोड को कैसे डुड़ेगे यह जानलेते है। 
इसके लिए पहले 9 कलर की पोजीशन  याद रखनी है की कोनसा कलर किस नंबर पर  है,जो कुछ इस तरही की है।

ये 9 कलर की पोजीशन याद कर लेते है, तो  Resistor color code को आसानी से शिख सकते हो
यह हमारे पास एक रेसिस्टर है जिसका कलर कोड कुछ इस तरही का है।

यह 4 बेंड का Resistor है जिसमे Brown, Black or Red or tolerance ring में  gold color है।
रेसिस्टर कलर कोड को कैलकुलेट करने के लिए पहले किस डायरेक्शन से स्टार्ट करे यह समझते है , जो रसिस्टर की टॉलरेंस रिंग होती है उसके विपरीत धीसा में जो कलर होता है वह पहला कलर कॉड का नंबर होता है यह पहला कलर brown है, दूसरा black और जो तीसरा कलर है वह मल्टीप्लय का कलर होता है। 
brown कलर का नंबर है और black कलर का नंबर है 0 और तीसरा नंबर है red उसका नंबर है  2 और है मल्टीप्लय की बंद में है तो इसमें 100 से मल्टीप्लय करना होगा। यदि यह red की जगह दूसरा कलर हॉट जैसे की green तो इसे 100000 से मल्टीप्लय करना होता क्यू की ग्रीन का कोड नंबर 5 है इसी तरह सभी का कलर कोड के नंबर के आधार पर इसमें zero होते है।   

4 बैंड का जिस तरह कोड से रेजिस्टेंस डूडा उसी तरह हमे 5 और 6 बैंड का भी फाइंड  किया जाता  है। यह इस फिगर में देख सकते है।

उधारण 

Example #1

इस resistor में कलर है Yellow-Violet-Orange-Gold इसका रेजिस्टेंस 47kΩ और tolerance +/- 5%.

Example #2

इस Resistor में कलर है Green-Red-Gold-Silver would be 5.2 Ω with a tolerance of +/- 10%.
जब तीसरा कलर gold या silver होगा तब gold के लिए वलु को Multiply नहीं करेंगे उसे divide करेंगे गोल्ड के लिए 10 से और सिल्वर को 100 से। 

Example #3
इस Resistor में कलर है White-Violet-Black इस का रेजिस्टेंस 97 Ω और इसका  tolerance of +/- 1% है क्यू की इसमें टॉलरेंस रिंग brown है। फिगर- xx में दिया हुआ है। 

Example #4

यह रेसिस्टर 5 band वाला है, Orange-Orange-Black-Brown-Violet और इसका  रेजिस्टेंस  3.3 kΩ और tolerance of +/- 0.1%.

Example #5

यह रेसिस्टर का कलर  Brown-Green-Grey-Silver-Red इसका रेजिस्टेंस 1.58 Ω और इसका  tolerance +/- 2%.

Example #6

यही 6 band का रेसिस्टर है और इसमें इसका टेम्परेचर भी दिया हुआ है  Blue-Brown-Green-Silver-Blue would be 6.15 Ω with a tolerance of +/- 0.25%, temp 50 ppm/c है। 

इस फिगर में रेसिस्टर है उसके कलर कोड के आंसर दिए हुए है। 

रेजिस्टेंस की पावर रेटिंग क्या होती है
जब कोई प्रतिरोध बिना खराब हुए अपने अंदर से ज्यादा से ज्यादा करंट गुजार देता है तो वह उस प्रतिरोध की पावर रेटिंग कहलाती है किसी भी प्रतिरोध की पावर रेटिंग पता करने के लिए एक फार्मूला होता है.
किसी भी प्रतिरोध की पावर राइटिंग पता करने के लिए उसमें से प्रवाह हो रहे करंट का flow और उसके रजिस्टेंस से गुणा करने  पर हमे , इससे हमे  रजिस्टेंस के  पावर रेटिंग मिल जायेगा.
 तो ऊपर आपको प्रतिरोधक के मान को पता करने से संबंधित पूरी जानकारी देने की कोशिश की है. अगर आप जानना चाहते थे कि resistor information in hindi resistance in hindi language resistor color code resistance value formula how to identify resistors by color types of resistance in hindi how to read resistor color code resistance kya hai in hindi तो ऊपर दी गई जानकारी आपके लिए बिल्कुल उपयुक्त है अगर आपको यह जानकारी फायदेमंद लगे तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करें अगर इसके बारे में आपका कोई भी सवाल या सुझाव हो तो नीचे कमेंट करें.

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

Stabilizer in Hindi स्टेबलाइजर की पूरी जानकारी हिंदी में

स्टेबलाइजर क्या होता है घर के लिए सही वोल्टेज स्टेबलाइजर आपने वोल्टेज स्टेबलाइजर के बारे में जरूर सुना होगा और आपके घर में stabilizer जरूर होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्टेबलाइजर क्या होता है?(what is stabilizer ?) क्या आप जानते हैं कि स्टेबलाइजर का काम क्या है और स्टेबलाइजर कितने प्रकार के होता है? क्या आप जानते हैं कि स्टेबलाइजर कैसे काम करता है? यदि नहीं जानते हैं तो हमारा ये पोस्ट जरूर पढ़ें। इस पोस्ट में आज हम स्टेबलाइजर की पूरी जानकारी हिंदी(stabilizer in Hindi) में देने जा रहे हैं। स्टेबलाइजर एक ऐसी डिवाइस होती है जो कि Fix Value की वोल्टेज प्रदान करता है.हमारे घर में कुछ ऐसे उपकरण होते हैं जिन्हें कम से कम 240 V की सप्लाई की जरूरत होती है और कुछ कारणवश हमारे घर में अगर सप्लाई 240V से कम आती है तो वह उपकरण ठीक प्रकार से कार्य नहीं कर पाता इसीलिए उसके लिए स्टेबलाइजर की जरूरत पड़ती है. जो कि हमारे घर में आने वाली सप्लाई को 240V पर Fix कर के उपकरण को 240V की सप्लाई प्रदान करता है. स्टेबलाइजर का इस्तेमाल ज्यादातर रेफ्रिजरेटर  (फ्रिज) एयर कंडीशनर इत्यादि पर किया जाता है.

वायर जॉइंट के Different प्रकार

 Different Types of Wire Joint Requirement:- किसी भी तार में जॉइंट बनाने की जरुरत क्यों पड़ती है किसी भी वायर में जॉइंट बनाने की जरुरत इसलिए पड़ती है ताकि किसी भी चालक तार की लम्बाई बढ़ाई जा सके और किसी चालक लाइन में से किसी अन्य लाइन को जॉइंट बनाकर उसे स्थाई रूप से जोड़ा जा सके जॉइंट ऐसा होना चाहिए की वह लाइन को अच्छे कनेक्ट तथा लाइन को पर्याप्त सुद्रढ़ता भी प्रदान कर सके,,इन जोइन्टो को विभिन्न प्रकार से तैयार किया जाता है यह चालक तार की मोटाई,जोड़ की किस्म,जॉइंट किस लाइन में लगाना है इत्यादि पर निर्भर करती है  ।   Different Types of  Joints:-ओवर हेड लाइन्स तथा घरेलु वायरिंग में मुख्यतः निम्न जोड़ प्रचलित है  Twisted Joint(ऐंठा हुआ जोड़) :- इस प्रकार के जॉइंट में तारो अथवा केबल के चालक सिरों को आपस में ऐंठ कर उनके अंतिम समापन सिरों को जोड़ की और मोड़ देते है इस प्रकार का जॉइंट ओवर हेड लाइन में खम्बो के ऊपर लगे इंसुलेटर पर लगाया जाता है इसे किसी लाइन के मध्य में नहीं लगाया जाता है इसे Pig Tail अथवा Rat-Tail Joint जॉइंट भी कहते है।    Married Joint(मैरीड जॉइंट) :- इस प्रकार के जॉइंट में तारो अथ

Star Delta Starter In Hindi | स्टार डेल्टा स्टार्टर | का प्रयोग मोटर में क्यों किया जाता है ?

स्टार डेल्टा स्टार्टर |Star Delta Starter इस Article मे स्टार डेल्टा कनेक्शन, Star Delta Formula, स्टार डेल्टा स्टार्टर का सिद्धांत, पावर डायग्राम, कन्ट्रोल डायग्राम, स्टार डेल्टा स्टार्टर के लाभ एवम नुकशान और स्टार डेल्टा स्टार्टर से संबधित इंटरव्यू में पूछे जाने वाले सवाल पे भी विस्तृत में जानकारी देने की कोशिश की हे। आशा हे आप के लिए मददगार होगी। Star Delta Starter मोटर को सलामती पूर्वक चालू करने के लिए, मोटर का रक्षण करने के लिए एवम मोटर का स्टार्टिंग करंट कम करने के लिए उपयोग किया जाता हे। मोटर को स्टार्ट करने के लिए और भी कही टाइप के स्टार्टर हे। जैसे की डायरेक्ट ऑन लाइन स्टार्टर, स्टार डेल्टा स्टार्टर, ऑटो ट्रांसफार्मर स्टार्टर, सॉफ्ट स्टार्टर, vfd (Variable Frequency Drive) और रोटर रेजिस्टेंस स्टार्टर, जो मोटर को सलामती पूर्वक चालू भी करते हे,और सुरक्षा भी प्रदान करते हे। स्टार डेल्टा स्टार्टर क्या है? एक स्टार्टर का काम हे स्टार्ट करना। यहां एक इलेक्ट्रिक मोटर स्टार्टर की बात हे। स्टार डेल्टा स्टार्टर याने, एक इलेक्ट्रिकल उपकरण जो कही उपकरणों को एकत्रित करके तैयार किया जाता ह